CBSE का बड़ा कदम: गुजरात में 27 जनवरी से शुरू होगा शिक्षकों के लिए 'कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम', जानें पूरी डिटेल

भारत की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन को धरातल पर उतारने के लिए सीबीएसई अब गुजरात के शिक्षकों के लिए विशेष 'कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम' (Capacity Building Programme - CBP) आयोजित करने जा रहा है। यह कार्यक्रम 27 जनवरी 2026 से शुरू होकर फरवरी के मध्य तक चलेगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए 'कौशल शिक्षा' (Skill Education) को प्रभावी ढंग से लागू करना है। इसके लिए एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा विकसित 'कौशल बोध' (Kaushal Bodh) एक्टिविटी बुक्स का सहारा लिया जाएगा। आइए, इस खबर के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।


गुजरात में प्रशिक्षण कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल

सीबीएसई ने गुजरात के विभिन्न शहरों में इन प्रशिक्षण सत्रों के लिए एक विस्तृत समय सारणी जारी की है। यह कार्यक्रम राज्य के प्रमुख शैक्षिक केंद्रों में आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक शिक्षक इसका लाभ उठा सकें।

तारीखस्थान / शहरवेन्यू (Venue)
27 जनवरी 2026अहमदाबाद/गांधीनगरएंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (EDII)
27 जनवरी 2026गांधीनगरग्रीन वैली स्कूल फॉर चिल्ड्रन
29 जनवरी 2026वडोदरासिग्नस वर्ल्ड स्कूल
30 जनवरी 2026सूरतश्री वशिष्ठ विद्यालय
04 फरवरी 2026राजकोटद राजकुमार कॉलेज

यह कार्यक्रम सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित किए जाएंगे। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों को इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा, हालांकि यात्रा और अन्य भत्ते (TA/DA) बोर्ड द्वारा देय नहीं होंगे।


क्या है 'कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम' (CBP) और इसका महत्व?

कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम केवल एक साधारण वर्कशॉप नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development - CPD) की एक सुनियोजित प्रक्रिया है।

1. आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का समावेश

पुराने समय में शिक्षा का अर्थ केवल किताबों को पढ़ना और परीक्षा देना था। लेकिन वर्तमान डिजिटल युग में शिक्षकों को आधुनिक उपकरणों, डिजिटल साक्षरता और नई शिक्षण विधियों (Pedagogy) से लैस होना अनिवार्य है। CBP के माध्यम से शिक्षकों को यह सिखाया जाता है कि वे कैसे जटिल विषयों को सरल और रोचक बनाकर छात्रों को समझा सकते हैं।

2. कौशल शिक्षा (Skill Education) पर जोर

NEP 2020 का एक प्रमुख स्तंभ 'कौशल आधारित शिक्षा' है। सीबीएसई का मानना है कि यदि छात्र कम उम्र (कक्षा 6 से 8) से ही कौशल विकास की ओर ध्यान देंगे, तो वे भविष्य के लिए अधिक तैयार होंगे। गुजरात जैसे औद्योगिक राज्य में, जहाँ कौशल की मांग हमेशा रहती है, यह प्रोग्राम मील का पत्थर साबित हो सकता है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और '50 घंटे' का अनिवार्य प्रशिक्षण

सीबीएसई का यह कदम सीधे तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों से जुड़ा है। नीति के अनुसार, प्रत्येक शिक्षक को हर साल कम से कम 50 घंटे का सतत व्यावसायिक विकास (CPD) प्रशिक्षण पूरा करना अनिवार्य है।

  • विभाजन: इन 50 घंटों में से 25 घंटे बोर्ड या सरकार द्वारा आयोजित प्रशिक्षण (जैसे यह गुजरात वाला प्रोग्राम) और शेष 25 घंटे स्कूलों द्वारा आयोजित आंतरिक प्रशिक्षण के माध्यम से पूरे करने होते हैं।

  • प्रमाणिकता: गुजरात में आयोजित होने वाले इन सत्रों के बाद मिलने वाले प्रमाण पत्र शिक्षकों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण रिकॉर्ड के रूप में मान्य होंगे।


'कौशल बोध' एक्टिविटी बुक्स: शिक्षा का नया स्वरूप

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का केंद्र बिंदु एनसीईआरटी द्वारा तैयार की गई 'कौशल बोध' पुस्तकें हैं। ये पुस्तकें केवल सैद्धांतिक नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से गतिविधि (Activity) आधारित हैं।

  • क्या होगा खास? इन पुस्तकों के माध्यम से शिक्षकों को सिखाया जाएगा कि कैसे बिना किसी भारी विभाजन (No Hard Separation) के व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा के विषयों जैसे गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के साथ जोड़ा जाए।

  • प्रायोगिक ज्ञान: शिक्षकों को डमी क्लासरूम एक्सरसाइज करवाई जाएंगी ताकि वे स्कूल जाकर छात्रों को 'लर्निंग बाय डूइंग' (करके सीखना) के सिद्धांत पर पढ़ा सकें।


गुजरात के शिक्षकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

गुजरात भारत का एक प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्र है। यहाँ की शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए सीबीएसई विशेष प्रयास कर रहा है।

  1. सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स (Sahodaya School Complexes): सीबीएसई यह कार्यक्रम राज्य के सहोदय परिसरों के सहयोग से आयोजित कर रहा है। सहोदय का अर्थ है 'साथ बढ़ना'। यह नेटवर्क स्कूलों के बीच सहयोग और ज्ञान साझा करने की संस्कृति को बढ़ावा देता है।

  2. शिक्षकों का करियर ग्रोथ: जो शिक्षक इन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और अपने कौशल को अपडेट करते हैं, उनके करियर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। प्रमोशन और वार्षिक मूल्यांकन में इन प्रशिक्षणों का बड़ा योगदान होता है।

  3. छात्रों के परिणामों में सुधार: जब शिक्षक प्रशिक्षित होते हैं, तो वे छात्रों की जिज्ञासाओं का बेहतर समाधान कर पाते हैं। इससे छात्रों की वैचारिक स्पष्टता (Conceptual Clarity) बढ़ती है और बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उनका प्रदर्शन सुधरता है।


पंजीकरण (Registration) की प्रक्रिया: शिक्षक कैसे जुड़ें?

सीबीएसई ने इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी रखा है। इच्छुक शिक्षक निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं:

  1. सीबीएसई ट्रेनिंग पोर्टल: सबसे पहले सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट या 'ट्रेनिंग पोर्टल' (cbseit.in) पर जाएं।

  2. लॉगिन: स्कूल अपने एलओसी (LOC) क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके शिक्षकों का पंजीकरण कर सकते हैं, या व्यक्तिगत शिक्षक भी 'Individual Participant' के रूप में पंजीकरण कर सकते हैं।

  3. प्रोग्राम चयन: गुजरात वाले शेड्यूल (CBP for Skill Education) को चुनें और अपनी सुविधानुसार शहर और तारीख का चयन करें।

  4. पुष्टि: सफल पंजीकरण के बाद, शिक्षकों को ईमेल के माध्यम से प्रशिक्षण स्थल और अन्य दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे।

महत्वपूर्ण नोट: प्रत्येक प्रतिभागी को अपने साथ एनसीईआरटी की 'कौशल बोध' पाठ्यपुस्तक की एक प्रति ले जाना अनिवार्य है।


अन्य राज्यों में सफलता के बाद गुजरात की बारी

गुजरात से पहले सीबीएसई ने इसी तरह के कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, छत्तीसगढ़, हरियाणा, दिल्ली, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सफलतापूर्वक आयोजित किए हैं। इन राज्यों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद अब बोर्ड गुजरात में इस मॉडल को लागू कर रहा है।

वहाँ के शिक्षकों का मानना है कि इन कार्यक्रमों ने उन्हें रटने की प्रवृत्ति से हटाकर छात्रों को व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाने में मदद की है।


शिक्षा के भविष्य की ओर एक दृढ़ कदम

सीबीएसई द्वारा गुजरात में आयोजित किया जा रहा यह 'कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम' केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत की नींव रखने का प्रयास है। जब शिक्षक सशक्त और कौशल-सम्पन्न होंगे, तभी वे एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर पाएंगे जो न केवल शिक्षित हो, बल्कि स्वावलंबी और रचनात्मक भी हो।

गुजरात के सभी संबद्ध स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को सलाह दी जाती है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और शिक्षा के इस महाकुंभ में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या यह ट्रेनिंग सभी सीबीएसई शिक्षकों के लिए अनिवार्य है?

Ans. हाँ, NEP 2020 के अनुसार प्रति वर्ष 50 घंटे का CPD प्रशिक्षण अनिवार्य है, और यह प्रोग्राम उसी का हिस्सा है।

Q2. क्या इस प्रशिक्षण के लिए कोई फीस देनी होगी?

Ans. नहीं, बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन ऑन-साइट कार्यक्रमों के लिए कोई प्रशिक्षण शुल्क नहीं लिया जाएगा।

Q3. क्या मुझे ट्रेनिंग के बाद कोई सर्टिफिकेट मिलेगा?

Ans. हाँ, सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, सीबीएसई के कौशल शिक्षा विभाग द्वारा डिजिटल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा, जो शिक्षक के रिकॉर्ड में दर्ज होगा।

Q4. क्या दूसरे राज्यों के शिक्षक इस गुजरात प्रोग्राम में शामिल हो सकते हैं?

Ans. सामान्यतः ये कार्यक्रम क्षेत्रीय स्तर पर होते हैं, लेकिन यदि पोर्टल पर विकल्प उपलब्ध है और आपके स्कूल प्रबंधन को आपत्ति नहीं है, तो आप पंजीकरण कर सकते हैं।

Q5. 'कौशल बोध' किताब कहाँ से प्राप्त करें?

Ans. यह पुस्तक एनसीईआरटी की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड की जा सकती है या अधिकृत विक्रेताओं से प्राप्त की जा सकती है।

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